कम नहीं किन्नौरवासियों की मुसीबतें

रिकांगपिओ/सांगला। किन्नौर में प्राकृतिक आपदा के करीब दो हफ्ते बाद भी लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कई संपर्क मार्ग अभी बंद पड़े हैं, तो कई पंचायतों में अभी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। संपर्क सड़कें बंद होने की वजह से लोगों की फसल खेतों में सड़ रही हैं। प्राकृतिक आपदा में बेघर हुए लोग अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने के लिए मजबूर हैं। रिकांगपिओ/सांगला। जिले की करीब एक दर्जन पंचायतों में अभी भी ब्लैक आउट है। विद्युत बोर्ड बारिश से जगह-जगह टूटी तारों को जोड़ नहीं पाया है। इसके चलते लोगों को जिंदगी अंधेरे में गुजर बसर करनी पड़ रही है। दूसरी ओर सरकार से आर्थिक मदद न मिलने से बेघर लोग रिश्तेदारों के यहां पनाह लेने को मजबूर हैं। किन्नौर में अभी आकपा तक ही बिजली की आपूर्ति बहाल हो पाई है। इससे आगे ठंगी, कुनो चारंग, कानम, आसरंग, रोपा, नेसंग, लियो, पूह, हांगो, चुलिंग, समधो और चांगो आदि क्षेत्रों में ब्लैक आउट है। 16 और 17 जून को हुई बर्फबारी और बारिश से इन क्षेत्रों में बिजली की तारें जगह-जगह से टूट गई हैं। अभी तक बिजली बोर्ड इन लाइनों को दुरुस्त नहीं कर पाया है। इन क्षेत्रों में बिजली कब आएगी, यह अधिकारियों को भी नहीं पता। कई-कई मीटर तारें क्षतिग्रस्त होने से इनको जोड़ने में वक्त लगेगा। बारिश के कारण चुलिंग, टापरी, कीमो खालंग, पूदोनाला और रखठोला आदि स्थानों पर तीन दर्जन से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। मकानों में दरारें आने पर इन लोगों को अपने आशियानें छोड़ने पड़े हैं। सरकार की ओर से उचित आर्थिक सहायता न मिलने से इन लोगों के पास इतनी राशि नहीं है कि अपने लिए आशियानें बना सकें। इसलिए, इन्हें रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ रही है। जिला उपायुक्त कैप्टन जेएम पठानिया ने बताया कि प्रशासन की ओर से बेघर हुए लोगों के खानपान की उचित व्यवस्था की गई है। तहसीलदार सांगला राजपाल भारद्वाज ने बताया कि सांगला वैली में बेघर हुए लोगों को दो से पांच हजार की आर्थिक सहायता के अलावा खाद्य सामग्री भी दी गई है।

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